एक दीवार, दो हिस्से हिंदी कहानी | EK DIWAR, DO HISSE INSPIRATIONAL HINDI STORY :-

जय आईने के आगे खड़े होकर बहुत उदास मन से अपनी पगड़ी सही कर रहा था तभी उसकी नज़र आईने के बीच दिख रही पतली सी दरार पर पड़ी मानो वो दरार आईने को दो हिस्सों में बाट रही हो,

Ek diwar, Do Hisse An Inspirational Hindi Story


उसे देख कर वो और भी उदास हो गया , माना जाता रहा है टुटा हुआ आइना देखना बिलकुल भी शुभ नही होता है , मन ही मन उसने सोचा आज बाजार से नया आइना ज़रूर लायेगा , घर दो हिस्सों में बटने के बाद आज पहली बार वह बाज़ार है वह बिलकुल भी खुश नहीं है वैसे तो वह ये महीने में एक बार लगने वाली बाज़ार में कब से जाता रहा है और सबके लिए ज़रूरी सामान भी वही लाता है , अपने साथ साथ विजय के परिवार और उनके बच्चो के लिए भी पर आज ...|

उसने खिड़की से अपने घर पर निगह डाली ये पुरखो के ज़माने से बना मकान आज दो हिस्सों में एक दीवार के सहारे बट गया है और ये दीवार उसके दिल को भी कई हिस्सों में तोड़ रही थी, वो अशुभ दिन जिस दिन ये बंटवारा हुआ था तब से ले कर आज तक जय - विजय में बातचीत बिलकुल खत्म सी हो गयी है |

बाहर विजय गाय दुह कर दूध निकालने की तैयारी में लगा हुआ है, हाँ तैयारी करे भी क्यों न, जब समानों के दो हिस्से हुये थे तब गाय उसी के हिस्से में जो चली गयी थी , जय अपने छोटे भाई विजय को निहार ही रहा था कि उसकी अपनी बारह साल की छोटी सी बेटी राधा पर गयी, जो हाथ में एक गिलास लिए चाचा की ओर धीरे धीरे बढ़ रही थी , जय उसे रोकना चाहता था पर उसका दिल इतना दुखी था कि आवाज भी गले में ही फंसकर रह गयी थी , इस दीवार का असर बेटी पर क्या होगा ये सोच कर उसका दिल बहुत जोर धडक रहा था |


पर ये क्या ... विजय ने भतीजी राधा को देख कर मुस्कुराते हुए , उसके हाथो से गिलास ले लिया और तुरन्त ताज़ा दूध भर कर मुस्कुराते हुए उसे पकड़ा दिया, जय का मानो दिल एक दम रुक सा गया हो वो बिना पलके झपकाए ये सब देख रहा था तभी विजय की पत्नी घर से निकली उसको देख कर जय को विश्वास था ये राधा से गिलास छीन कर उसको बुरा भला कहेगी क्योंकि उस बटवारे के अशुभ दिन मुंह बना कर बिना कोई लाज शर्म के उसके सामने आ खड़ी हुयी जो हुयी थी पर ये क्या ... आज वो राधा को देख कर हल्की सी मुस्कुरायी पर कही विजय देख ना ले इसलिए अंदर चली गयी |
राधा ने एक ही सांस में पूरा दूध पी कर गिलास खाली किया और घर को वापस भाग आई | जय की आँखे आंसुओ से भर आई  |

उसने आईने में देखते हुए अपने आंसू पोछे , और फिर आईने पर हाथ फेरा ये क्या एक पतला सा बाल उसके हाथ में आ गया और आइना बिलकुल साफ हो गया | जिसे वो दरार समझ बैठा था वो तो उसके मन का भ्रम था जो एक हाथ घुमाते ही साफ हो गया | वो अब बहुत ही खुश था मानो उसके घर में दिखने वाली वो दीवार अचानक से कही गायब हो गयी हो |

उसने ख़ुशी ख़ुशी अपनी पगड़ी सम्भाली और बाहर आया फिर पड़ोसियों को सुनाता हुआ बहुत तेज़ आवाज में बोला, "ओ भाई विजय, मैं बाज़ार जा रहा हूँ | तेरे को जाने की कोई जरूरत नहीं है | मैं सबके लिए समान लेता आऊंगा |
कुछ बाते घर में दीवार बना सकती है, पर दिल में नहीं | 


Rishte or dil Hindi Quotes
 रिश्तो में दीवारे दिमाग खींचता है , दिल नहीं |


लेख पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद् ||




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