मृत्यु का भय ( Story in Hindi)

The Fear Of Death Story in Hindi


हर इंसान के अन्दर किसी ना किसी प्रकार का डर होता है कभी किसी में पढाई का किसी में असफलता का तो किसी में किसी और का, परन्तु क्या आप जानते है डर हमेशा डराने के लिए नहीं होता हैं कभी कभी यह हमे आगे बढ़ने की भी प्रेरणा भी देता है| बस बशर्ते आप उसको पूरी तरफ से महसूस करे,डर के बारे में आगे बताने से पहले आपको इस से relative एक कहानी बताते है |



image source- Google images            Editing- Aryan Prime



ये कहानी हैं Fear of Death अर्थात् मृत्यु के भय के बारे में...

एक धनवान व्यक्ति था, बडा विलासी था। हर समय उसके मन में भोग विलास सुरा-सुंदरी के विचार ही छाए रहते थे। वैसे तो वह अपने इन कुविचारो से खुद भी बहुत परेशान था पर क्या करता वह खुद की आदतो से लाचार था , ये कुविचार थे जो उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
 

एक दिन की बात है उसकी मुलाकात एक सूफी संत से हो गयी । वह अपने विचारो और आदतों से बहुत परेशान था इसलिये उन से अपने अशुभ विचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगा।

संत ने कहा अच्छा, अपना हाथ दिखाओं, हाथ देखकर संत भी चिंता में पड गये। संत बोले बुरे विचारों से मैं तुम्हारा पिंड तो छुडा देता, पर तुम्हारे पास समय बहुत ही कम है। आज से ठीक 30 दिनों के बाद तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी और यह पूर्णता निश्चित हैं , इतने कम समय में तुम्हे इन कुविचारो और बुरी आदतों से निजात कैसे दिला सकता हूं। और फ़िर तुम्हें भी तो तुम्हारी तैयारियां करनी होगी।

वह व्यक्ति चिंता में डूब गया। अब क्या होगा, चलो समय रहते यह मालूम तो हुआ कि मेरे पास समय कम है। वह घर और व्यवसाय को व्यवस्थित व नियोजीत करने में लग गया। परलोक के लिये पुण्य अर्जन की योजनाएं बनाने लगा, कि कदाचित परलोक हो तो पुण्य काम लगेगा। वह सभी से अच्छा व्यवहार करने लगा।

जब एक दिन शेष रहा तो उसने विचार किया, चलो एक बार संत के दर्शन कर लें।

संत ने देखते ही कहा- "बडे शान्त नजर आ रहे हो, जबकि मात्र एक दिन शेष है'। अच्छा बताओ क्या इस अवधि में कोई सुरा-सुंदरी की योजना बनी क्या?"

व्यक्ति का उत्तर था- "महाराज! जब मृत्यु समक्ष हो तो विलास कैसा?"

संत हंस दिये। और कहा- "वत्स! अशुभ चिंतन से दूर रहने का मात्र एक ही उपाय है “मृत्यु निश्चित है यह चिंतन सदैव सम्मुख रखना चाहिए,और उसी ध्येय से प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए”।




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ऐसा ही आजकल students के साथ होता साल भर पढ़ते हैं तो उनको लगता हैं कि उन्हें याद नहीं हो रहा चाहे वह कितना भी पढ़ ले, But वही जब वह exam से एक दिन पहले पढ़ते हैं तो उन्हें लगता हैं कि सब समझ आ गया हैं , अब हो सकता हैं इनका कोई वैज्ञानिक भी कारण हो परन्तु मुझे इतना पता है की डर हमारी क्षमताओ को कई गुना बढ़ा देता हैं। बस हमे उसे proper तरीके से apply करने की जरूरत होती हैं। और अगर वह डर आपके दिल से निकल जाता हैं तो वही work आपको बहुत कठिन लगता हैं जो डर में आप कुछ क्षण में कर लेते हैं।
पर इसका मतलब ये नहीं की आप हमेशा डर में ही रहे , मेरी इस post का एक लाइन में सारांश ये हैं कि डर जब भी आपके सामने आये तो आपको ये सोचना हैं की मुझे बस इस डर से जितना हैं। 
You can do... You will do...
 

I hope, मैं इस post के माध्यम से जो कहना चाहता था वो इस कहानी से पूर्ण हो गया होगा और आपको "The Fear Of Death Story in Hindi" पसन्द आयी होगी । तो कृपया इसे अपने मित्रो से Share करे।


लेख पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद् ||
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मृत्यु का भय ( Story in Hindi) मृत्यु का भय ( Story in Hindi) Reviewed by Anshul Gupta on 11:06:00 Rating: 5

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